Kuran ko Jalaa Do ... BuT क्यूँ ?

Think Zaraa हटके ...

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Amit Dehati


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लगाम, समाज में फैलती कुकृत्यों पे !!!

Posted On: 12 Jun, 2012  
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प्रेम के रोग बीमारी नियर …

Posted On: 26 Sep, 2011  
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कल फिर कुत्ते ने भौंका …

Posted On: 16 Jul, 2011  
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Others मस्ती मालगाड़ी लोकल टिकेट में

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“प्यार की परिभाषा-Valentine Contest”

Posted On: 14 Feb, 2011  
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Others मस्ती मालगाड़ी में

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“भला मासूम आसुंओं को, सजा क्या देना…-Valentine Contest”

Posted On: 12 Feb, 2011  
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“इतना बस दुआ देना …-Valentine Contest”

Posted On: 9 Feb, 2011  
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“दिल बहलाए बैठे है …-Valentine Contest”

Posted On: 5 Feb, 2011  
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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

pyar wo ehsas hai jo hamare janm lene ke saath hi dil me hota hai. lekin hamare marne ke baad bhi pyar kabhi khatma nahi hota hamesha jinda rehta hai. Pyar ka pehla ehsas to pyar karne wala hi jaan sakta, pyar ka apna alag hi maza hota. Jaise Suraj apni roshni sabhi ko barabar deta hai waise hi kudrat bhi sabhi ke dil me pyar ko basati hai. Pyar bhi kai prakar ke hote hai. Lekin jab hum kisi se pyar karne lagte hai to puri duniya simatkar humare kadmo mein lagti hai. Jaise hume Rab mil gaya ho. Lekin Rab kisi ek ka to ho nahi sakta isliye pyar hamesha adhura hi reh jaata hai.. kahi shama jalti hai to kahi parwana, kahi deel jalta hai to kahi Deewana Lekin is pyar ki tapan bhi eshi hoti hai ki is se bahar niklane ka mann hi nahi karta. Wo samne aati hai to rab yaad nahi rehta ... ek taraf yadi mera Pyar hai aur ek taraf Mujhe banane wala wo Khuda to mein sirf Pyar ko hi dekhunga us rab ko nahi usne hi mujhe esha banaya hai. pyar me dil tuta hai mera lekin sabdo me mein use bayan nahi kar sakta na hi kabhi koi kar payega.... bas us par mit jaane ko mann karta hai. Wo hawa me hai, wo paani me dikhti hai, sapno me wahi, neendo me, palko me, rom rom me, ab mein aur tu ka koi matlab hi nahi raha, Wo mujhme samai hui hai , har insan me uski chhavi dikhti hai, pata hai ki wo nahi ayegi lekin ahat pe uske hi aane ka ehsas hota he, dil me wo hi samai he, is dard k saath jeene se to maut achchi lekin roka hai us pyar ne jo roj kahti hai ki beta ghar kab aaoge? Bas itna jaante hai hum ki:- KABHI KISI KO MUKAMMAL JAHA NAHI MILTA.

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सर ये प्रतीकिर्या इस लेख पर नहीं आपने एस पी सिंह जी के लेख "मुझे इंडियन होने पर गर्व है" पर मेरी प्रतिकिर्या पर जो अपने विचार दिए उसका में आभारी हूँ, आपने लिखा की सिंह जी ने उनके विचारो को लिखा था ना की उनकी राजनीती को अब आप ही बताये जो आदमी दुनिया को दिखता तो ये है की उसके विचार कितने नेक है पर करता तो घटिया राजनीती ही तो इसका मतलब साफ़ है के वो इंसान दोगला है. और आप लिखते हो ये सब सूनी सुनायी बाते है तो सिंह जे जो उद्धरण दे रहे है वो भी सूनी सुनायी है ना तो मैंने न सिंह जी ने या आज किसी ने भजी लाइव अपनी आँखों से देखा नहीं. रही बात किताबी ज्ञान किताबे कैसे और क्यों लिखी जाती है सबको पता है गाँधी पर आज तक सत्य लिखा नहीं गया जो लिखा गया उसे कांग्रेस सरकार ने बाज़ार में आने नहीं दिया. इसलिए जो किताबे है उसे अपने हिसाब से आप पड़ने के लिए स्वतंत्र हो पदों पर अपना दिमाग भी लगाओ, सचाई ये है की गाँधी बहरूपिया था उसके प्रती मेरी भावनाए नहीं बदल सकती आपको मेरी भाव्नाऊ से ठेश लगी उसके लिए में शमा चाहता हूँ,

के द्वारा: anil9gupta anil9gupta

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भाई देहाती जी, थोड़ी कसक और बौराने के भाव के कारण इस नेमत को बीमारी घोषित कर दिया आपने ? यदि प्यार कोई बीमारी होती, तो प्यार की पीर जिनके दिलों में इस बसंत में अंगड़ाइयां ले रही है, ज़रा उनके चेहरों को गौर से निहारें, आपको जवाब मिल जाएगा । जो प्यार में पड़े हुए होंगे, उनके चेहरे की गुलाबी रंगत और लुनाई आपको चीख-चीख कर बता देगी कि बंदा इस वक़्त धंधे पर है । यदि लड़की या महिला हुई तो आप ठगे से उसे दूर तक निहारने पर बाध्य हो जाएंगे । प्यार में कशिश ही ऐसी होती है । क्या यह बीमार और खराब स्वास्थ्य की निशानी है ? बीमार वो दिखते हैं जिन्हें बदनसीबी से कभी प्यार का दीदार नहीं हुआ । ऐसे लोग हमेशा पिचके चेहरे और मुहर्रमी सूरत के साथ ही दिखेंगे, चाहे विशुद्ध हरियाणवी गाय के घी में ही डुबाकर रख दो । अरे भैया, प्यार तो वो टानिक है जो बीमारों को मिनटों में चंगा कर दे । आप कभी भी प्रेमियों को मिलते या एकदूसरे के प्रेमपत्र पढ़ते ही देख लें । एकदूसरे के सामने पड़ने से पहले और बाद में देखे गए दोनों के चेहरों की तुलना करें, आपको ठीक वही फ़र्क़ दिखेगा जो किसी गंजे की खल्वांट खोपड़ी बढ़िया क्वालिटी का विग लगाने से पहले और बाद में दिखती है । ज़रा याद कीजिये - 'जब इश्क़ को माशूक़ का दीदार हो जाए, तो सड्डा इस क़दर भागे के मोटर कार हो जाए' । और आप हैं कि बीमार घोषित किये दे रहे हैं । बधाई ।

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आदरणीय भ्राता श्री मेरा मानना हैं की इस मंच का हमें सदुपयोग करना चाहिए और जन कल्याण में जन सहयोग में कुछ मत रखने चाहिए और उसे अमल करने चाहिए ! हम सभी JJ के पाठक गड़ को एक दुसरे का सहयोग करना चाहिए अपने सुविचारों के माध्यम से ! लेकिन इस मंच को कुछ लोग मन बहलाने का अच्छा जरिया मान लिए हैं और इसे चैट ID की तरह मिसयूज कर रहें है | शायद उनके कमेन्ट बढ़ने का बहुत अच्छा जरिया बन गया हैं | इस मंच पे गप्पे भी लड़ा रहें है | शायद उन्हें अपने कमेन्ट बढाने का ज्यादा शौक हैं ! भ्राता श्री आपने अपने ज्ञान के दो शब्दों से मुझे अनुग्रहित किया इसके लिए बहुत बहुत आभार ! कृपया यूँ ही स्नेहाशीष देते रहें ! धन्यवाद !

के द्वारा: Amit Dehati Amit Dehati

प्यारे -२ अमित कुमार शहरी बाबू .... नमस्कार ! आप की यह कविता वाकई में अच्छी है ....लेकिन आपने जो यह बात प्रस्तावना में कही है की कुछ लोग ईष्र्या रखते है आपसे , उससे मैं बिलकुल भी सहमत नही हो सकता हूँ .... यह बात दर्शाती है की आपका नजरिया चीजों को देखने का उल्टा पुल्टा है .... यहाँ का एक ही सर्वमान्य नियम है की तुम मुझे कमेन्ट दो बदले में मैं भी तुमको कमेन्ट दूँगा ...... आप जितना बोते हो उतना ही काट लेते हो .... इसके इलावा आपकी प्रतिभा का भी इसमें अहम रोल रहता है .... तो अगर किसी ने आपसे ईष्र्या करनी होगी तो वोह आपके कमेंटो की बजाय भगवान से शुकाय्त करेगा की उसको क्यों नाही ऐसा टैलेन्ट दिया ..... आपको अपनी सोच की दिशा और दशा दोनों ही बदलने की बहुत ही जरूरत है .... धन्यवाद

के द्वारा: rajkamal rajkamal

अमित जी... नमस्कार.... बेबाक टिपण्णी यही है... की जो पसंद आये उसकी तारीफ़ करें जो विचार चुभ जाए उस पर शालीनता से अपने विचार रखें... यह मंच विचारों का मंच हैं... छोटी छोटी बातें दिल पर मत लीजिये... हम सब यहाँ कुछ सिखने आते हैं... हाँ ऐसा होता है कुछ लोग छोटे दिल के होते हैं ... दिल बड़ा कीजिये... प्रेम की वर्षा कीजिये... और स्वयं भी इस वर्षा में प्रेम से सराबोर हो जाइए... आप अच्छा लिखते हैं... लिखते रहिई... प्रतिक्रियाओं को छोड़िए... हमारा लक्ष्य होना चाहिए बेहतर लेखन... हाँ यह बात जरुर है की लेखन के सुधार के लिए प्रतिक्रियाएं महत्वपूर्ण हैं... लेकिन कुछ लोग हैं जो नहीं चाहते की उनके पोस्ट पर विपरीत प्रतिक्रिया आये ... इससे वे तिलमिला जाते हैं... उनके अहम् को ठेस पहुँचती है... ऐसा मुझे लगा है... क्यूंकि मई तो अगर प्रतिक्रिया दूंगा तो अपने विचार जरुर रखूँगा अगर मेरी राय अलग है तो उससे लेखक को अवगत अवश्य कराऊंगा... और अपने पोस्ट पर भी चाहूँगा की आप सब बेबाक राय रखें महज खानापुती ना करें... कम से कम मई तो इस मंच पर... झूटी पब्लिसिटी के लिए नहीं आया हूँ... आपको मेरी और से शुभकामनाएं.... www.himanshudsp.jagranjunction.com

के द्वारा:

अमित जी यकीन मानिए इस मंच पर मतभेद होना स्वाभाविक है...... पर मनभेद इस मंच पर नहीं होने चाहिए....... क्योकि यहाँ हम कुछ प्रयास करते हैं की हम लोग मिलकर कुछ विषयों पर चर्चा करें ओर अपने अपने सुझावों से उस विचार को मजबूत करें...... मिस्र की क्रांति इस इंटरनेट ओर सोशियल नेटवर्किंग साइट्स के द्वारा ही संभव हुई..... तो यहाँ वैचारिक मतभेद से कोई नया विचार निकालना चाहिए... यहा हमारे आभासी संबंध बनते हैं...... जहा हम शब्दों से जुड़े हैं......... इस शब्दों मे विकास ओर विनाश दोनों की शक्ति है...... तो इनको हम सार्थक दिशा मे ही लगाएँ........ ये सारे मतभेद क्षणिक हैं..... आप चिंता न करें यहाँ मज़ाक करने ओर सहने दोनों का साहस दिखाना पड़ता है....

के द्वारा: Piyush Pant, Haldwani Piyush Pant, Haldwani

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प्रीती जी नमस्ते ! सबसे पहले आपका मेरे ब्लॉग में बहुत बहुत स्वागत है ! प्रीती जी मेरे साथ ऐसा कुछ नहीं हुआ जिससे मुझे बुरा लगे .......क्यूंकि उससे मेरे ऊपर कोई फर्क नहीं पड़ा ......तकलीफ मुझे ये सोच के हुआ की क्या पैसा ही सब कुछ है ....ये सब जो मेरे साथ हो रहा है , पैसे की वजह है ? अगर पैसे की वजह से ऐसा हो रहा है तो आने वाले दिनों में कोई किसी के पास जाएगा ही नहीं ....... और रही बात दोस्ती निभाने और न निभाने की तो प्रीती जी मैं जानता हु की मेरा दोस्त बहुत ही नेक दिल इन्शान है लेकिन फिर भी हर किसी की मर्यादाएं होती है .......खैर उसको बुरा नहीं लगा क्यूंकि उसी के कहने पे मैंने ऐसा किया था ....... बाद में उसने मुझसे सॉरी भी बोला | लेकिन प्रीती जी कल क्या होगा जब पैसे की अहमियत लाइफ में इस कदर बढ़ जाएगी तब.

के द्वारा:

दोस्त अमित, तुम्हारा गिफ्ट सायद उस महफ़िल में सबसे ज्यादा अच्छा रहा होगा, क्योंकि उस गिफ्ट के साथ था तुम्हारा प्यार, तुम्हारी भावनाए, और तुम्हारी सच्ची दोस्ती, नहीं था तो सिर्फ यदा पैसा ???? किसी को क़द्र नहीं हमारे ज़ज्बातों की, जो भी है सब कुछ पैसा ही है... तो क्या हमें अपने जज्बातों की तिलांजलि दे देनी चाहिए ? नहीं बिलकुल नहीं! यही सब कुछ तो है जो हमें उस भीड़ से अलग करता है (ये अलग बात है भीड़ से अलग चलने वाले को लोग पागल कहते है)! लेकिन दोस्त कोई फर्क नहीं पड़ता की लोग तुम्हारे-मेरे बारे में क्या सोचते है! हमें तो बस चलते जाना है, सब को माफ़ करते हुए! और मुझे यकीन है एक रोज उन्हें हमारी वलुए होगी और हमारी ज़रूरत भी .... पर शायद तब हम ही न हो... चलता है यार.... जो दिल में हो वो करो... इस खुदगर्ज़ जहाँ में दिल की सुनने वाले है ही कितने?

के द्वारा: Prakash Kharayat Prakash Kharayat

देहातीजी, सर्वप्रथम तो आपकी कविता के लिए मै आपको बधाई देना चाहती हूँ. दूसरे आपकी इस स्टोरी में मेरी यह समझ में नहीं आया कि आप शर्मिंदा क्यूँ हुए. मै अंदाज़ लगा रही हूँ कि आप अपने दोस्त के जन्मदिवस पर एक फीका गिफ्ट लेकर पहुंचे थे सबने आपकी हंसी उडाई और आप शर्मिंदा हो गए और आपका मनोबल कम हो गया. यदि ऐसा है तो मै आपसे कुछ शब्द मै पूछना चाहूंगी कि आप शर्मिंदा क्यों हुए. आप अपनी भावना को व्यक्त करने के लिए गिफ्ट लेकर गए थे. यदि आपके दोस्त के व्यवहार से आप आहत हुए तो आपको ऐसे दोस्त का साथ छोड़ देना चाहिए जो आपकी नहीं आपके गिफ्ट की ज्यादा कद्र करता है. दोस्ती यदि आपके द्वारा दिए गए कीमती तोहफे पर टिकी है तो उसको छोड़ देना ही अच्छा है. दूसरे यदि दोस्त के घर आये बाकी मेहमानों ने आपकी बेइज्जती की है तो वह आपके लिए कोई मायने नहीं रखती क्यूँकी आप पहली बार उनसे मिले थे और भविष्य में आपको उनसे मिलना भी नहीं चाहिए. तीसरे आप अपने आपको इतना कम करके क्यूँ आंकते हैं.यदि आप खुद अपनी इज्जत नहीं करेंगे तो दूसरों से अपनी इज्जत करने की उम्मीद कैसे करेंगे? प्रत्येक व्यक्ती का एक मान-सम्मान होता है उसको बनाए रखना उसका अधिकार है. बड़े आश्चर्य की बात है कि एक छोटी सी गिफ्ट के पीछे आपने अपना मनोबल कम कर लिया. चौथे मुझे नहीं मालुम कि आप किन परिस्थितियों में वह गिफ्ट लेकर गए थे.हो सकता है आपके पास अच्छी गिफ्ट लेने के लिए उस समय पर्याप्त धन न हो. यदि ऐसा है तो यह क्या शर्म की बात है? मुझे तो ऐसा नहीं लगता. यदि मेरी किसी बात से आपकी भावनाएं आहत हुई हो तो मै क्षमा चाहूंगी. धन्यवाद

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मै आपका बहुत-बहुत शुक्रगुज़ार हूँ जो आपने इस बात को रखी.....अगर आपको बुरा लगा हो तो इसके लिए खेद है | मेरा कोई इरादा नहीं है की मेरा ब्लॉग लाइट में रहे और ये लोगों के ध्यानाकर्षण के लिए नहीं है | बस एक विचार जो दिल में था वो सबको बताना चाहता था ...| .. वैसे गलत गलत होता है ........मैं इस बात को समझ सकता हूँ ////////... एक बात और ....कुरान को जला दो उसके बाद डाट डाट है मतलब आगे भी कुछ है इसमें | उसके बाद देखो मगर प्यार से ....मतलाब उसी बात को इंडिकेट करने के लिए की आप पाजिटिव रहें ......पहली बार कुरान को जला दो कोई भी पढ़ेगा तो गाली ही देगा बस उसी को समझाने के लिए ...की थिंक पॉजिटिव. मै आपका स्नेह आगे भी चाहूँगा .. शुक्रिया !

के द्वारा: Amit Dehati Amit Dehati

दरअसल मैं पहला लेख लिखा था कुरान को जला दो नमक ......| उस समय ब्लॉग लिखने का बहुत शौक था लेकिन सेंटिंग करने नहीं जनता था | जबकि जो लेख मैंने लिखा था इसका सीधा मतलब था की कोई भी धर्म ग्रन्थ किसी को गलत तालीम नहीं देता | ये अपने ऊपर डिपेण्ड करता है की हम बात को किस तरह से समझते है | आयर यही बातें मने उस पोस्ट में लिखा है | उस समय टाइटल तो लिखा लेकिन मुझे नहीं पता था की ये ऐसे ही रह जायेगा | कुछ दिन बाद मने दूसरा पोस्ट प्रस्तुत किया तो टाइटल कुरान को जला दो ही रह गया ........\ फिर मैंने सोचा अरे यार ये तो बहुत गलत बात है किसी के भावनाओं को आघात करना .....| खैर जब मैं सेंटिंग करने जान गया तो उसे चेंज करने का इरादा ही बदल गया ....रीजन था .......... मेरा ब्लॉग कुरान को जला दो ......या कोई भी ब्लॉग पोस्ट करता है तो एक अलग सन्देश देता है एक अलग बात कहता | बस मैंने भी चाहा की कुरान के प्रति रखने वाले गलत धरना को सबके दिलों से निकल दे ........ एक बार हर जो भी मेरा ब्लॉग पढता हो वो इस बात को समझ सके .....

के द्वारा: Amit Dehati Amit Dehati

अमित साहब अभिवादन, आपने मेरे पोस्ट को पढ़ा, प्रतिक्रिया दी साथ ही अपने पोस्ट पर विजिट हेतु आमंत्रण भी दिया. शुक्रिया. १- Kuran ko Jalaa Do …देखो, मगर प्यार से Think Zaraa हटके … ये आपका ब्लाग टाइटल है. 'Think Zaraa हटके …' तो समझ आ आता है लेकिन आपके लेखों को पढ़कर 'Kuran ko Jalaa Do …देखो, मगर प्यार से' समझ नहीं आ रहा है. निहायत सुन्दर विचार हैं आपके. निश्चित ही ध्यान आकर्षण हेतु आपने 'Kuran ko Jalaa Do …देखो, मगर प्यार से' टाइटल रखा होगा. २- आज पूरा विश्व ग्लोबल ग्राम में तब्दील हो रहा है. हमारा देश भी ग्रामीण प्रस्ठभूमि का ही है. ऐसे में हम सभी देहाती ही हुए. ३- इस दुनिया में मुझे लगता है की कोई भी पूर्ण ज्ञानी नहीं है, आपकी जानकारी में कोई यदि हो तो बतायं. ऐसे में सभी अल्प ज्ञानी ही हुए. ४- मनुष्य अपने कर्म से जाना जाता है. सामान्यतः मामलों में भाव पोस्ट को मिलता है पोस्ट करने वाले को नहीं. शुक्रिया.

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अमित जी ... हम तो आपसे किसी मुशायरे कि आस लगाए बैठे थे ..... इधर आपकी भाभी श्री के बहुत से कपड़े भी फीचने के लिए इकट्ठा हुए पड़े है ..... वोह नामुराद सिर्फ मेरे हाथ के धुले हुए ही पहनना पसंद करती है , नही तों फिर मेरी धुलाई किया करती है .... देखना भाई जरा जल्दी कोई मुशायरा करवाना , कहीं ऐसा ना हो कि वोह बेचारी इतनी सर्दी में मल्लिका कि तरह ...........................? भाई साहिब आपने कविता दी है तों मैंने अपना दिल दिया था गिफ्ट में ..... हाल मेरा भी कुछ आपसे जुदा नही था.... उस शेयर को अगले लेख में पेश करूँगा .... आपकी कविता अच्छी है , लेकिन इस को बेहतरीन कहना अनुचित होगा ..... उम्मीद है कि जितना आप ज्यादा लिखेंगे ,और भी निखरते जायेंगे ....

के द्वारा: rajkamal rajkamal

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अमित जी, नव वर्ष की शुभ कामनाएँ काफी दिन से सोंच रहा था आपकी रचनाओं को पढूं | देरी के लिए क्षमा | अब आप की शाइरी के बारे में……………….. ख्याल नया नहीं है, जो की बड़ी बात है, इतनी जल्दी संभव भी नहीं ग़ालिब के लिए भी कहते हैं की उन्होंने पुराने ख्यालों को नए ढंग से अपनी शाएरी में पिरोया था | आप तुक बंदी अच्छी करते हैं लेकिन आपके अशार बहर से ख़ारिज हैं | जिस तरह हिंदी के दोहे , छंद आदि में मात्राएँ होती हैं उसी तरह उर्दू शाएरी में बहर होती है | थोड़ी सी उर्दू भी सीखने की ज़रुरत है | उर्दू सीख लीजिये मैं आपका शागिर्द ( शिष्य) बन जाऊंगा | उर्दू ज़बान बहुत मीठी ज़बान है मैं भी सीखना चाहता हूँ लेकिन हिंदी सीखने के बाद |………………. कोई गुस्ताखी हुई हो तो माफ़ी ……….. danishmasood.jagranjunction.com

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अमित जी, नव वर्ष की शुभ कामनाएँ काफी दिन से सोंच रहा था आपकी रचनाओं को पढूं | देरी के लिए क्षमा | अब आप की शाइरी के बारे में.................... ख्याल नया नहीं है, जो की बड़ी बात है, इतनी जल्दी संभव भी नहीं ग़ालिब के लिए भी कहते हैं की उन्होंने पुराने ख्यालों को नए ढंग से अपनी शाएरी में पिरोया था | आप तुक बंदी अच्छी करते हैं लेकिन आपके अशार बहर से ख़ारिज हैं | जिस तरह हिंदी के दोहे , छंद आदि में मात्राएँ होती हैं उसी तरह उर्दू शाएरी में बहर होती है | थोड़ी सी उर्दू भी सीखने की ज़रुरत है | उर्दू सीख लीजिये मैं आपका शागिर्द ( शिष्य) बन जाऊंगा | उर्दू ज़बान बहुत मीठी ज़बान है मैं भी सीखना चाहता हूँ लेकिन हिंदी सीखने के बाद |................... कोई गुस्ताखी हुई हो तो माफ़ी ........... danishmasood.jagranjunction.com

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