Kuran ko Jalaa Do ... BuT क्यूँ ?

Think Zaraa हटके ...

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पैसा या प्रेम ......

Posted On: 24 Jan, 2011 Others में

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आप सभी आदरणीय को मेरा प्रणाम स्वीकार हो !!!!!


क्या पैसा इसकदर बेरहम हो जायेगा ? कृपया निचे पढ़ें और अपना विचार व्यक्त करें !


एक बार फिर मेरे अल्प-ज्ञान ने गुस्ताखी की है | और नतीजा आप लोगों के सामने ……थोडा सा इधर उधर करके समझ लीजियेगा आप लोग .


आदरणीय ,

बहुत ही दुःख के साथ लिखना पड़ रहा है की लोग पैसे के अहमियत के आगे सब कुछ भूलते जा रहे हैं .

मुझे चिंता तब की हो रही जब लोगों से अपेक्षाएं बढ़ जाएगी कीमती गिफ्ट लेने की . ….| क्या होगा उस समय …?

हर सोसाइटी में हर किसी के अमीर रिश्तेदार होते हैं और गरीब भी .| तो क्या आमिर की पार्टी में गरीब रिश्तेदार जाना बंद कर देंगे ?

आने वाले उन दिनों की फ़िक्र हो रही है , जब लोग पैसे की वजह से अपने प्रिय मित्र, रिश्तेदार , यहाँ तक की कुछ ऐसे है जिनके लिए दोस्त ही सब कुछ है,  उनके  प्रेम की बलि देनी पड़ेगी | क्या होगा उनका ?


अपने शानो  शौकत के पीछे अपने प्रियजनों को भूल सकते है | मुझे शर्म आ रही है की ऐसे भी लोग हैं जो अच्छे गिफ्ट के लिए झूठी शानो शौकत के पीछे सब कुछ भूल सकते है |


अगर गरीब प्रेमी हो और प्रेमिका अमीर हो  दोनों एक दूजे के बिना नहीं जी सकते . ….फिर क्या होगा उनका , क्या प्रेमिका की पार्टी में प्रेमी नहीं आएगा ? क्या इस तरह हम संस्कृति और अपने समाज को भ्रष्ट कर सकते है ? क्या पैसा ही सब कुछ हो जायेगा ?


उस पार्टी ने मुझे कई मुद्दों पर बहस करने को बाध्य कर दिया …..| ऐसा नहीं है की मै हतास हूँ बल्कि मुझे बहुत कुछ सिखने को मिला उस पार्टी से |

रही बात भावनाओं की तो वैसे भी इसको समझने वाले बहुत कम ही बचे है |

खैर मैं आप लोगों से राय लेना चाहूँगा इस विषय पर ….. धन्यवाद !


आप लोगों का अल्प-ज्ञानी अमित देहाती (गवांर ) थोडा सा टाइम खोटा करेगा …… जिसके लिए मैं माफ़ी चाहूँगा |


एक बात और ये पंक्तिया मैंने उसे गिफ्ट किया था लेकिन बेकाम साबित हुई |
धन्यवाद !


                                                  आप लोगों का शुभचिंतक
                                                      अमित देहाती 

फूलों सा खिला , खुशियों से भरा .
सुख शांति का अम्बार रहे
दुःख पास न हो शुख की आस न हों
अधरों पे ख़ुशी का सार रहे …..


ऐसा ही मन कुछ कहता है ….
तेरा खुशनुमा संसार रहे ….


बड़ी मुद्दत से दिन आया है ,
खुशियों का माहौल भी छाया है .
सब बाँट लो खुशियाँ मिल-जुलकर .
मन हर्षित यूँ ही हर बार रहे …


ऐसा ही मन कुछ कहता है ,
तेरा खुशनुमा संसार रहे….


तुम हटो नहीं कभी मुस्किल से ,
डट करके जित लो हर मुश्किल .
मुश्किल को मुश्किल रहने दो ,
ये लालच तुम्हे हरबार रहे …


ऐसा ही मन कुछ कहता है ,
तेरा खुशनुमा संसार रहे.


इन चन्द पंक्तियों के पीछे एक छोटी सी स्टोरी है , जो मैं सोच रहा हूँ की आप लोगों के बिच इसे शेयर करना चाहिए .–

मेरे दोस्त का बर्थडे था और मुझे निमंत्रण मिला था | मैं पहुंचा तो अभी कार्यक्रम में टाइम था | वैसे तो मैंने गिफ्ट लिया था लेकिन बाकियों के सामने मेरा गिफ्ट फीका था जबकि वो मेरा बेस्ट फ्रेंड था | मै सोचा यार दोस्त का बर्थडे है , यहाँ तो मेरी इज्ज़त की वाट लग जाएगी और मेरा दोस्त भी मेरी वजह से शर्मिंदा होगा |


फिर मेरे अल्प-ज्ञान ने मुझसे कुछ कहा …. …….जो मुझे अच्छा लगा | मैंने सोचा चलो यार गिफ्ट जो है सो तो है ही , थोडा अल्प ज्ञान की बात मान ली जाए शायद बात बन जाए . लेकिन कुछ नहीं हुआ सिवाए शर्मिंदगी के | आलम ये था की कोई सुनना ही नहीं चाहता था | मेरे दोस्त के काफी रेकुएस्ट पर लोगों ने थोड़ी सी शांति बनाई लेकिन फिर भी,, शायद किसी को पसंद नहीं आया ऐसा मुझे लगा और मैं रुशवा हुआ ……….तबसे कही भी महफ़िल में बोलने की आदत ही चली गई …|


बाकि आप लोग समझदार हो , आपलोग समझ सकते है की मेरे ऊपर क्या गुज़रा होगा ?
अगर यहाँ रूश्वाई मुझे मिलती है तो कोई गम नहीं क्यूंकि मुझे पता है की उसी काबिल हूँ | लेकिन मैं कभी किसी बात को लेके टेंसन नहीं
पालता ये मेरी कमी है |


 
                                             अमित देहाती 

 क्षमा चाहूँगा , कृपया तार्किक प्रतिक्रिया करें !
आप लोगों की टिप्पड़ी की जरुरत है अपनी लेखनी को सुधारने के लिए !
धन्यवाद !

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180 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Gerry के द्वारा
May 26, 2011

You’re a real deep tnhiker. Thanks for sharing.

    Amit Dehati के द्वारा
    February 15, 2011

    Thank you very much…..

Ashish के द्वारा
February 7, 2011

आपकी ये पंक्तियाँ बहुत ही खुबसूरत लगी ! फूलों सा खिला , खुशियों से भरा . सुख शांति का अम्बार रहे दुःख पास न हो शुख की आस न हों अधरों पे ख़ुशी का सार रहे ….. बस आप लिखते रहें ! बधाई स्वीकार करें !

    Amit Dehati के द्वारा
    February 7, 2011

    प्रसंशा के लिए आभार ! प्रतिक्रिया करने की जहमत उठाई …बहुत बहुत आभार ! बहुत बहुत धन्यवाद !

Ashok Verma के द्वारा
February 7, 2011

देहाती साहब यहाँ अशुओं का कोई मोल नहीं

    Amit Dehati के द्वारा
    February 7, 2011

    बहुत बहुत धन्यवाद !

PK के द्वारा
February 7, 2011

अच्छा सब्जेक्ट …अछि कविता ….अच्छा लेखन ….अच्छा अत्विश्वास ….अच्छा और सबकुछ अच्छा ……..बिलकुल सच्चाई झलक रही है ! लिखते रहो…धन्यवाद !

    Amit Dehati के द्वारा
    February 7, 2011

    प्रसंशा के लिए आभार ! बहुत बहुत आभार ! धन्यवाद !

omprakash pareek के द्वारा
February 7, 2011

देहातीजी, अच्छा लिखा है. जड़ में जाइए तो हम सभी देहाती है. रहा भाषा का सवाल सो आपकी भाषा में एक अच्छा खासा प्रवाह है जो पढने में अच्छा लगता है. अछे लेखन का सिर्फ एक ही फार्मूला है की बस लिखते रहिये और जितना संभव हो सके अछे लेखकों की रचनाएँ पढ़ते रहें. वैसे मुझे आपके लेखन में कोई ऐसी कमी नहीं दिखाई देती जिस पर कमेन्ट करूं oppareek43

    Amit Dehati के द्वारा
    February 7, 2011

    आदरणीय ओमप्रकाश जी स्वागत है आपका ! बिलकुल सही कहा आपने | हम सब देहाती हैं , लेकिन ये जो सहरी करन की आंधी चाली है, लोग अपना अस्तित्वा खोते जा रहे हैं ….. प्रसंशा के लिए आभार ! प्रतिक्रिया करने की जहमत उठाई …बहुत बहुत आभार ! बहुत बहुत धन्यवाद !

shalinitiwari के द्वारा
February 6, 2011

अमित जी, सिर्फ इतना कहना चाहूंगी कि ये दुनिया है जो सिर्फ मजाक बनाना जानती है पर फिर भी आप के दोस्त ने तो आपकी कद्र की जिसके लिए आप वो तोहफा ले के गए थे. ऐसे दोस्त भी बरी मुश्किल से मिलते है इस पैसे की दुनिया में सो कृपया महफ़िल में बोलने की आदत न छोड़े क्योकि महफ़िल में हर शख्स बोल भी नहीं पाता. दुनिया अपने लिए जीती है तो जब दुनिया हमारे लिए कुछ नहीं छोरती तो हम अपनी अच्छी आदते क्यों छोड़े.

    Amit Dehati के द्वारा
    February 7, 2011

    आदरणीय तिवारी जी स्वागत है आपका ! बिलकुल सही कहा आपने |वास्तव में वह एक अच्छा दोस्त है ! मुझे न उससे शिकायत है न वहां मौजूद लीगों से ….दुःख हो रहा है आज के ह्युमन नेचर पे …! प्रसंशा के लिए आभार ! बस यूँ ही हौसला अफजाई करते रहिये! प्रतिक्रिया करने की जहमत उठाई …बहुत बहुत आभार ! बहुत बहुत धन्यवाद !

Ajay sinha के द्वारा
February 6, 2011

तुम हटो नहीं कभी मुस्किल से , डट करके जित लो हर मुश्किल . मुश्किल को मुश्किल रहने दो , ये लालच तुम्हे हरबार रहे … ये लाइन बहुत सुन्दर है ……रेअली

    Amit Dehati के द्वारा
    February 7, 2011

    प्रसंशा के लिए आभार ! बस यूँ ही हौसला अफजाई करते रहिये! प्रतिक्रिया करने की जहमत उठाई …बहुत बहुत आभार ! धन्यवाद !

Amit Jee के द्वारा
February 6, 2011

भगवान् करें आप दिन-दुनी रात चौगुनी तरक्की करें / ताकि विरोधियों का मुह बंद हो जाए !

    Amit Dehati के द्वारा
    February 7, 2011

    प्रसंशा के लिए आभार ! बस यूँ ही हौसला अफजाई करते रहिये! बहुत बहुत धन्यवाद !!

Amit Jee के द्वारा
February 6, 2011

अमित जी वाकई ऐसे मौके पर किसी को दुःख होगा लेकिन समझदारी तो होनी ही चाहिए ! आपकी कविता दिल को छू गई | बहुत सुन्दर धन्यवाद !

    Amit Dehati के द्वारा
    February 7, 2011

    बहुत बहुत आभार ! धन्यवाद !

Abhay Singh के द्वारा
February 6, 2011

अमित जी नमस्कार ! बहुत ही मजेदार अमित जी / धन्यवाद !

    Amit Dehati के द्वारा
    February 7, 2011

    बहुत बहुत धन्यवाद !.

simran के द्वारा
February 6, 2011

i like your poem

    Amit Dehati के द्वारा
    February 7, 2011

    Respected Simran, you are most welcome ! Thanks to this valuable comment …..

    Amit Dehati के द्वारा
    February 7, 2011

    Thanks a lot ….

professorsahil के द्वारा
February 5, 2011

paisa jenai ki vajah paisa marnai ka sabak aaj hamari samaj mai familly mai dosto mai jo bhe rishtai chal rahai hai wo paiso ki he vajah sai chal rahe hai jiskai paSS jitna paisa uski utne puch

    Amit Dehati के द्वारा
    February 7, 2011

    आदरणीय प्रफेसर सर स्वागत है आपका ! बिल्कुल सही कहा आपने | दुःख हो रहा है आज के ह्युमन नेचर पे …! प्रसंशा के लिए आभार ! बस यूँ ही हौसला अफजाई करते रहिये! प्रतिक्रिया करने की जहमत उठाये …बहुत बहुत आभार ! बहुत बहुत धन्यवाद !

Pranshu के द्वारा
February 4, 2011

देहाती भाई अपने ट्रू स्टोरी से इमोशनल कर दिया !!!!!!!!!!!!!!!!!!!

    Amit Dehati के द्वारा
    February 4, 2011

    आपके अनमोल प्रतिक्रिया का आभारी हूँ ! बहुत बहुत धन्यवाद !!!

AKD के द्वारा
February 4, 2011

बुल्कुल सही कहा सर्वेश जी | दुनिया में जितने बुरे कर्म है वो सब पैसे के ही लिए हो रहे है | लोग पैसे के लिए अपने जमीर तक को बेंच दे रहे है खैर बहुत ही इमोशनल स्टोरी से अवगत कराया ….धन्यवाद और आपकी कविता वाकई महान है , इसके आगे सभी गिफ्ट फेल हैं बहुत बहुत बधाई !

    Amit Dehati के द्वारा
    February 4, 2011

    प्रिय AKD जी , न बाबु न भैया सबसे बड़ा रुपैया …….शायद आप भी सुने होंगे | और दुनियां में अपराध का सबसे बड़ा स्रोत पैसा ही है खास करके भारत जैसे देश में,,,,,,,,,,,,, तारीफ के लिए मैं आपका शुक्रगुज़ार हूँ !

Sarvesh Mishra Mumbai के द्वारा
February 4, 2011

सच कहा आपने आज पैसा ही सबसे ज्यादा जरूरी हो गया है !पैसो के लिए ही खून हो रहे है,पैसों के लिए ही प्रेमी और प्रेमिका अलग हो रहे है!!पैसों के लिए ही इस महान देश के महान नेता लोग भ्रष्ट हो गए है!!

    Amit Dehati के द्वारा
    February 4, 2011

    आदरणीय सर्वेश जी नमस्कार ! सबसे पहले आपका बहुत बहुत स्वागत है , जो आपने यहाँ पधारा…. आपने अपने स्नेह के काबिल समझा …….इसके लिए आभार …. तारीफ के लिए बहुत बहुत धन्यवाद ! बस इस स्नेह को यूँही जारी रखियेगा |

    Amit Dehati के द्वारा
    February 4, 2011

    बिलकुल आपने सही कहा | ये नेता लोगों का ही देन है की मेरा भारत महान कभी महान नहीं बन सका ! इस स्नेह में कमी मत आने दीजियेगा ! धन्यवाद !

Vijay के द्वारा
February 3, 2011

बहुत सुन्दर अमित जी …भाउक कर दिए !

    Amit Dehati के द्वारा
    February 3, 2011

    आपके अनमोल प्रतिक्रिया का आभारी हूँ ! बहुत बहुत धन्यवाद !

Roshan pandey के द्वारा
February 3, 2011

बहुत सुन्दर प्रस्तुति ….अपने अपने लेख में सबकुछ किया | हंसाया भी . आपका शेर लाजवाब रहा !

    Amit Dehati के द्वारा
    February 3, 2011

    आपके अनमोल प्रतिक्रिया का आभारी हूँ !

Pinky Pandey के द्वारा
February 3, 2011

अमित जी नमस्ते, बहुत ही सुन्दर अपनी आपबीती सुनाया | हमें दुःख है आजके भागम भाग ज़माने पर की लोग सबकी अहमियत और भावनाओं का भी कद्र करना भूलते जा रहे . धन्यवाद

    Amit Dehati के द्वारा
    February 3, 2011

    आपके अनमोल प्रतिक्रिया का आभारी हूँ ! बहुत बहुत धन्यवाद ! आपके इस इस तरह के प्यार को देखकर मुझे बहुत हर्ष हो रहा है .

Munna Singh के द्वारा
February 2, 2011

अमित जी नमस्ते. सच में यार आपके कलम में जादू है ……आपकी साड़ी लेखनी मैंने पढ़ा . सच कहूँ बहुत मजा आया ……… अच्छी लेखनी के लिए बधाई !

    Amit Dehati के द्वारा
    February 2, 2011

    मुन्ना सर आपके इस इस तरह के प्यार को देखकर मुझे बहुत हर्ष हो रहा है . बहुत बहुत धन्यवाद !

Jnaid Bangalor के द्वारा
February 2, 2011

And your story is looking like natural . is it True story………? Please Reply.

    Amit Dehati के द्वारा
    February 2, 2011

    thank you very much.

    Amit Dehati के द्वारा
    February 7, 2011

    Exactly It’s True story

Jnaid Bangalor के द्वारा
February 2, 2011

Dear Amit Really there is no doubt that your poetry is not good. Your poetry is so great. Please keep it up becoz your future may brightness with this as per this circumstances. So don’t lose courage. God bless You! Thanks Junaid

    Amit Dehati के द्वारा
    February 2, 2011

    Welcome mr. Junaid. I’m very happy to your great compliment. thank you very much.

Nidhi के द्वारा
January 31, 2011

अमित बाबु , कुछ तो लोग कहेंगे, लोगों का काम है कहना ,,,, VERY NICE …… PLEASE KEEP IT UP. THANKS

    Amit Dehati के द्वारा
    January 31, 2011

    आपका बहुत बहुत स्वागत है …. प्रतिक्रिया के लिए आभार !

राजेन्द्र यादव के द्वारा
January 31, 2011

अमित जी घोर कलयुग का प्रकोप है ….पैसा ही सब कुछ है | अच्छी कविता के लिए बधाई !

    Amit Dehati के द्वारा
    January 31, 2011

    आपका बहुत बहुत स्वागत है …. बिल्कुल सही कहा आपने राजेन्द्र जी प्रतिक्रिया के लिए आभार !

    Coralee के द्वारा
    May 26, 2011

    You’ve got it in one. Couldn’t have put it betetr.

Thakur के द्वारा
January 31, 2011

अमित जी! दुनिया आनी जानी है ! यहाँ हर चीज़ फानी है!! खुद मांगती कुर्बानी है ! प्यासे को न देवे पानी है !! इस लिए किसी से कोई \’expectation \’ दर्द देता है |

    Amit Dehati के द्वारा
    January 31, 2011

    आपका बहुत बहुत स्वागत है …. बिल्कुल सही कहा आपने ठाकुर जी और हम नहीं चेते तो भविष्य बहुत बुरा होगा … प्रतिक्रिया के लिए आभार !

Anjani Tiwari के द्वारा
January 31, 2011

Awesome…….yarrrrrr

    Amit Dehati के द्वारा
    January 31, 2011

    Anjani जी thanks to your valuable comment .

Priya के द्वारा
January 31, 2011

बहुत अच्छी कविता — don’t lose your temper.

    Amit Dehati के द्वारा
    January 31, 2011

    Priya जी thanks to your valuable comment .

adil khan के द्वारा
January 31, 2011

अमित जी कौन पूछता आपके भावनाओं को | यहाँ तो दूसरों खिल्ली उड़ाने में मजा आता है ! बहुत सुन्दर अपनी कविता की प्रस्तुति की अमित जी…

    Amit Dehati के द्वारा
    January 31, 2011

    बिल्कुल सही कहा आपने आदिल जी …. आदिल जी हौसला अफजाई के लिए शुक्रिया ……

Manoj Singh के द्वारा
January 30, 2011

अमित जी नमस्कार ! कहने वाले का क्या अमित देहाती जी , आप अपना मनोबल मत खोइए … हमारी दुआएं आपके साथ है ….बहुत सुन्दर रचना है यकिन मानिये …… लोगों आपको नहीं पसंद किया हो सके बहुत बड़ी पार्टी होगी लोग माडर्न आनंद लेना चाहते हों …… धन्यवाद !

    Amit Dehati के द्वारा
    January 30, 2011

    मनोज जी हो सकता है जो आप कह रहे हो वो सही हो लेकिन किसी के भावनाओं के साथ खेलना| चूँकि गलती मेरी थी इस लिए मुझे बुरा नहीं लगा फिर भी ……इतनी तो समझदारी होनी ही चाहिए …. मनोज जी आपके तार्किक प्रतिक्रिया के लिए आभार ! शुक्रिया ~!

SAGAR के द्वारा
January 30, 2011

वाह अमित जी बहुत सुन्दर भावनाओं को व्यक्त किया आपने //// बधाई हो !!!!

    Amit Dehati के द्वारा
    January 30, 2011

    सागर जी आपके अनमोल प्रतिक्रिया का आभारी हूँ ! बस यूँ ही हौसल अफजाई करते रहे ! शुक्रिया !

Rashid के द्वारा
January 30, 2011

अमित भाई… मुझे शायिरी की समझ थोडा कम ही है लेकिन भावो को समझ सकता हूँ… वास्तव में दुआ से अच्छा तोहफा कुछ भी नहीं हो सकता है…. और वह आपने अपने दोस्त को दे दिया !! राशिद

    Amit Dehati के द्वारा
    January 30, 2011

    राशिद जी आपका बहुत -बहुत स्वागत है …….. आपके अनमोल प्रतिक्रिया का आभारी हूँ … पैसे रूपी जमने में कहाँ दुआ और कहा दया …….अब तो ये सब ढोंग की रक्षा करें वाला हथियार बन गया है …….. शुक्रिया !

acharyji के द्वारा
January 30, 2011

आपकी कविता अच्छी है .और उत्साह बढ़ाने बाली है

    Amit Dehati के द्वारा
    January 30, 2011

    acharyji जी स्वागत है आपका ! बस यूँ ही हौसला अफजाई करते रहे … शुक्रिया !

Prakash Kharayat के द्वारा
January 29, 2011

दोस्त अमित, तुम्हारा गिफ्ट सायद उस महफ़िल में सबसे ज्यादा अच्छा रहा होगा, क्योंकि उस गिफ्ट के साथ था तुम्हारा प्यार, तुम्हारी भावनाए, और तुम्हारी सच्ची दोस्ती, नहीं था तो सिर्फ यदा पैसा ???? किसी को क़द्र नहीं हमारे ज़ज्बातों की, जो भी है सब कुछ पैसा ही है… तो क्या हमें अपने जज्बातों की तिलांजलि दे देनी चाहिए ? नहीं बिलकुल नहीं! यही सब कुछ तो है जो हमें उस भीड़ से अलग करता है (ये अलग बात है भीड़ से अलग चलने वाले को लोग पागल कहते है)! लेकिन दोस्त कोई फर्क नहीं पड़ता की लोग तुम्हारे-मेरे बारे में क्या सोचते है! हमें तो बस चलते जाना है, सब को माफ़ करते हुए! और मुझे यकीन है एक रोज उन्हें हमारी वलुए होगी और हमारी ज़रूरत भी …. पर शायद तब हम ही न हो… चलता है यार…. जो दिल में हो वो करो… इस खुदगर्ज़ जहाँ में दिल की सुनने वाले है ही कितने?

    Amit Dehati के द्वारा
    January 30, 2011

    प्रकाश जी स्वागत है …….. आपके अनमोल प्रतिक्रिया का आभारी हूँ … इस बेदर्द ज़माने में भावनाओं का कोई कद्र नहीं ….दोस्त बिलकुल सही कहा आपने …कहने वालों का क्या | हम अपनी भावनाओं की तिलांजलि नहीं दे सकते ,,,,,,,,…….एक न एक दिन उन्हें समझ तो आएगा ही …… धन्यवाद !

Mala Srivastava के द्वारा
January 29, 2011

बहुत प्यारी पंक्तिया है !

    Amit Dehati के द्वारा
    January 30, 2011

    माला जी स्वागत है …….. आपके अनमोल प्रतिक्रिया का आभारी हूँ … कृपया इनायत बनाये रखे …….इस स्नेह में कमी न आने दें ….. धन्यवाद !

shailandra singh के द्वारा
January 29, 2011

अमित जी आपकी कविता अच्छी लगी लोगो की बात पर मत जाए लोगो का क्या है यहाँ तो लोग उगते सूरज को सलाम करते है बधाई हो.

    Amit Dehati के द्वारा
    January 30, 2011

    शैलेन्द्र जी , बहुत सुन्दर …….आपका स्वागत है …. बिलकुल सही कहा आपने ……. प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद !

mithlesh के द्वारा
January 28, 2011

पहली बार आपके ब्लोग पर आया बहुत अच्छा कविता पढ़कर ।

    Amit Dehati के द्वारा
    January 30, 2011

    मिथलेश जी बहुत बहुत स्वागत है ……कृपया यूँही हौसला अफजाई करते रहें … धन्यवाद !

Preeti Mishra के द्वारा
January 28, 2011

देहातीजी, सर्वप्रथम तो आपकी कविता के लिए मै आपको बधाई देना चाहती हूँ. दूसरे आपकी इस स्टोरी में मेरी यह समझ में नहीं आया कि आप शर्मिंदा क्यूँ हुए. मै अंदाज़ लगा रही हूँ कि आप अपने दोस्त के जन्मदिवस पर एक फीका गिफ्ट लेकर पहुंचे थे सबने आपकी हंसी उडाई और आप शर्मिंदा हो गए और आपका मनोबल कम हो गया. यदि ऐसा है तो मै आपसे कुछ शब्द मै पूछना चाहूंगी कि आप शर्मिंदा क्यों हुए. आप अपनी भावना को व्यक्त करने के लिए गिफ्ट लेकर गए थे. यदि आपके दोस्त के व्यवहार से आप आहत हुए तो आपको ऐसे दोस्त का साथ छोड़ देना चाहिए जो आपकी नहीं आपके गिफ्ट की ज्यादा कद्र करता है. दोस्ती यदि आपके द्वारा दिए गए कीमती तोहफे पर टिकी है तो उसको छोड़ देना ही अच्छा है. दूसरे यदि दोस्त के घर आये बाकी मेहमानों ने आपकी बेइज्जती की है तो वह आपके लिए कोई मायने नहीं रखती क्यूँकी आप पहली बार उनसे मिले थे और भविष्य में आपको उनसे मिलना भी नहीं चाहिए. तीसरे आप अपने आपको इतना कम करके क्यूँ आंकते हैं.यदि आप खुद अपनी इज्जत नहीं करेंगे तो दूसरों से अपनी इज्जत करने की उम्मीद कैसे करेंगे? प्रत्येक व्यक्ती का एक मान-सम्मान होता है उसको बनाए रखना उसका अधिकार है. बड़े आश्चर्य की बात है कि एक छोटी सी गिफ्ट के पीछे आपने अपना मनोबल कम कर लिया. चौथे मुझे नहीं मालुम कि आप किन परिस्थितियों में वह गिफ्ट लेकर गए थे.हो सकता है आपके पास अच्छी गिफ्ट लेने के लिए उस समय पर्याप्त धन न हो. यदि ऐसा है तो यह क्या शर्म की बात है? मुझे तो ऐसा नहीं लगता. यदि मेरी किसी बात से आपकी भावनाएं आहत हुई हो तो मै क्षमा चाहूंगी. धन्यवाद

    Amit Dehati के द्वारा
    January 30, 2011

    प्रीती जी नमस्ते ! सबसे पहले आपका मेरे ब्लॉग में बहुत बहुत स्वागत है ! प्रीती जी मेरे साथ ऐसा कुछ नहीं हुआ जिससे मुझे बुरा लगे …….क्यूंकि उससे मेरे ऊपर कोई फर्क नहीं पड़ा ……तकलीफ मुझे ये सोच के हुआ की क्या पैसा ही सब कुछ है ….ये सब जो मेरे साथ हो रहा है , पैसे की वजह है ? अगर पैसे की वजह से ऐसा हो रहा है तो आने वाले दिनों में कोई किसी के पास जाएगा ही नहीं ……. और रही बात दोस्ती निभाने और न निभाने की तो प्रीती जी मैं जानता हु की मेरा दोस्त बहुत ही नेक दिल इन्शान है लेकिन फिर भी हर किसी की मर्यादाएं होती है …….खैर उसको बुरा नहीं लगा क्यूंकि उसी के कहने पे मैंने ऐसा किया था ……. बाद में उसने मुझसे सॉरी भी बोला | लेकिन प्रीती जी कल क्या होगा जब पैसे की अहमियत लाइफ में इस कदर बढ़ जाएगी तब.

    Amit Dehati के द्वारा
    January 30, 2011

    प्रीती जी आपका अनमोल कमेन्ट बहुत ही मार्गदर्शक है मुझे अच्छा लगा …\ कृपया ये कृपा बनाये रखियेगा ! और हाँ एक बात और प्रीती जी आपके किसी भी बात का बुरा क्यूँ लगेगा ? यहाँ हर ब्लोगर / रीडर से मैं अनुरोध करता हूँ तर्कसंगत प्रतिक्रिया के लिए और उसमे आपका कमेन्ट बहुत ही प्रेरणा दायक रहा … मैं आपके बातों से सहमत हूँ ….. तारीफ़ के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद !

Suman Yadav के द्वारा
January 28, 2011

बहुत सुन्दर रचना

    Amit Dehati के द्वारा
    January 28, 2011

    सुमन जी आपका बहुत बहुत स्वागत है …. कृपया ये इनायत बरकरार रखे . तारीफ़ के लिए धन्यवाद !

राघव चौधरी के द्वारा
January 28, 2011

पांचवी सेंचुरी पर हार्दिक बधाई !!!!!!!!!!!! बस आप यूँही बढ़ते रहें !

    Amit Dehati के द्वारा
    January 28, 2011

    राघव जी बहुत बहुत धन्यवाद !

राघव चौधरी के द्वारा
January 28, 2011

अमित जी आपने जो अपनी भावनाए व्यक्त किये है वाकई काबिले तारीफ …. आपकी हर रचना जबरदस्त होती \ कम्माल की लेखनी है आपकी | बॉस आप यूँही लिखते रहे हमारी शुभ कामनाये आपके साथ है .|||||||||||

    Amit Dehati के द्वारा
    January 28, 2011

    राघव जी स्वागत है आपका ! बस यूँ ही हौसला अफजाई करते रहे … शुक्रिया !

AMIT KUMAR GUPTA के द्वारा
January 28, 2011

मन प्रसन्न हो गया अमित जी .आपकी कविता बहुत ही अच्छी होती हैं. बधाई .

    Amit Dehati के द्वारा
    January 28, 2011

    अमित जी स्वागत है आपका ! बहुमूल्य प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद !

vinaysingh के द्वारा
January 27, 2011

बहुत अच्छी रचना …बधाई

    Amit Dehati के द्वारा
    January 28, 2011

    विनय जी नमस्कार ! सबसे पहले आपने मुझे visit करने की इनायत की आपका स्वागत है ………. विनय जी हौसला अफजाई करने के लिए धन्यवाद !

Tufail A. Siddequi के द्वारा
January 27, 2011

अमित साहब अभिवादन, आपने मेरे पोस्ट को पढ़ा, प्रतिक्रिया दी साथ ही अपने पोस्ट पर विजिट हेतु आमंत्रण भी दिया. शुक्रिया. १- Kuran ko Jalaa Do …देखो, मगर प्यार से Think Zaraa हटके … ये आपका ब्लाग टाइटल है. ‘Think Zaraa हटके …’ तो समझ आ आता है लेकिन आपके लेखों को पढ़कर ‘Kuran ko Jalaa Do …देखो, मगर प्यार से’ समझ नहीं आ रहा है. निहायत सुन्दर विचार हैं आपके. निश्चित ही ध्यान आकर्षण हेतु आपने ‘Kuran ko Jalaa Do …देखो, मगर प्यार से’ टाइटल रखा होगा. २- आज पूरा विश्व ग्लोबल ग्राम में तब्दील हो रहा है. हमारा देश भी ग्रामीण प्रस्ठभूमि का ही है. ऐसे में हम सभी देहाती ही हुए. ३- इस दुनिया में मुझे लगता है की कोई भी पूर्ण ज्ञानी नहीं है, आपकी जानकारी में कोई यदि हो तो बतायं. ऐसे में सभी अल्प ज्ञानी ही हुए. ४- मनुष्य अपने कर्म से जाना जाता है. सामान्यतः मामलों में भाव पोस्ट को मिलता है पोस्ट करने वाले को नहीं. शुक्रिया.

    Amit Dehati के द्वारा
    January 28, 2011

    तुफैल जी आदाब ! सबसे पहले आपने मुझे visit करने की इनायत इनायत के आपका स्वागत है ………. अब ब्रदर मैं आपको बता की ये जो कुरान को जला दो मेरा टाइटल बेसक अट्रैक्टिव है लेकिन इसके पीछे एक छोटी सी स्टोरी है ….जो मुझे लगता है की आपको शेयर करना चाहिए …

    Amit Dehati के द्वारा
    January 28, 2011

    दरअसल मैं पहला लेख लिखा था कुरान को जला दो नमक ……| उस समय ब्लॉग लिखने का बहुत शौक था लेकिन सेंटिंग करने नहीं जनता था | जबकि जो लेख मैंने लिखा था इसका सीधा मतलब था की कोई भी धर्म ग्रन्थ किसी को गलत तालीम नहीं देता | ये अपने ऊपर डिपेण्ड करता है की हम बात को किस तरह से समझते है | आयर यही बातें मने उस पोस्ट में लिखा है | उस समय टाइटल तो लिखा लेकिन मुझे नहीं पता था की ये ऐसे ही रह जायेगा | कुछ दिन बाद मने दूसरा पोस्ट प्रस्तुत किया तो टाइटल कुरान को जला दो ही रह गया ……..\ फिर मैंने सोचा अरे यार ये तो बहुत गलत बात है किसी के भावनाओं को आघात करना …..| खैर जब मैं सेंटिंग करने जान गया तो उसे चेंज करने का इरादा ही बदल गया ….रीजन था ………. मेरा ब्लॉग कुरान को जला दो ……या कोई भी ब्लॉग पोस्ट करता है तो एक अलग सन्देश देता है एक अलग बात कहता | बस मैंने भी चाहा की कुरान के प्रति रखने वाले गलत धरना को सबके दिलों से निकल दे …….. एक बार हर जो भी मेरा ब्लॉग पढता हो वो इस बात को समझ सके …..

    Amit Dehati के द्वारा
    January 28, 2011

    मै आपका बहुत-बहुत शुक्रगुज़ार हूँ जो आपने इस बात को रखी…..अगर आपको बुरा लगा हो तो इसके लिए खेद है | मेरा कोई इरादा नहीं है की मेरा ब्लॉग लाइट में रहे और ये लोगों के ध्यानाकर्षण के लिए नहीं है | बस एक विचार जो दिल में था वो सबको बताना चाहता था …| .. वैसे गलत गलत होता है ……..मैं इस बात को समझ सकता हूँ ////////… एक बात और ….कुरान को जला दो उसके बाद डाट डाट है मतलब आगे भी कुछ है इसमें | उसके बाद देखो मगर प्यार से ….मतलाब उसी बात को इंडिकेट करने के लिए की आप पाजिटिव रहें ……पहली बार कुरान को जला दो कोई भी पढ़ेगा तो गाली ही देगा बस उसी को समझाने के लिए …की थिंक पॉजिटिव. मै आपका स्नेह आगे भी चाहूँगा .. शुक्रिया !

Deepak Jain के द्वारा
January 27, 2011

अमित जी, आप अपनी कविता को प्रस्तुत करने से पहले उसके लिए जो प्रस्तवना रखते हो काबिले तारीफ है एक अच्छी कविता से रूबरू करवाने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद

    Amit Dehati के द्वारा
    January 28, 2011

    दीपक जी नमस्कार ! सबसे पहले आपने मुझे visit करने की कृपा की आपका स्वागत है ………. दीपक जी आपका प्रतिक्रिया पढ़ कर एक नई उर्जा का संचार महसूस कर रहा हूँ ………तारीफ के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद | कृपया मेहरबानी बरकरार रखियेगा !

Vashim pathan के द्वारा
January 27, 2011

आपने भावुक कर दिया अमित जी …..अच्छा लगा | आपकी कविता में जान है | स्टोरी भी कम्मल की है | आपके अगले पोस्ट की बेशब्री से इंतज़ार है \ शुक्रिया !

    Amit Dehati के द्वारा
    January 28, 2011

    वशिम भाई आदाब ! आपका भावाभोर होना मुझे बता रहा है की आप भी एक अच्छे लेखक हो | क्यूंकि एक लेखक ही एक लेखक की फीलिंग बखुबा समझ सकता है . आपने अपने मेरे भावनाओं को अपने भावनाओं के माध्यम से व्यक्त किये इसके लिए आभार ….. शुक्रिया

pavan singh के द्वारा
January 27, 2011

अमित जी नमस्कार ! आपकी जितनी तारीफ़ की जाए कम है ..| एक बार फिर दमदार प्रस्तुति !.क्या बात है | भगवान् आपकी मनोकामना पूरा करें..|

    Amit Dehati के द्वारा
    January 28, 2011

    पवन जी ! तारीफ़ के लिए शुक्रिया ……| मैं चाहूँगा की आप ये इनायत हमेशा बनाये रखे .. शुक्रिया

sagar के द्वारा
January 27, 2011

अमित जी आप तो महारथी लगते हैं ……फिर रूश्वाई कैसा ….. वो सभी के सभी बेवकूफ थे…….वस्तव में …. बहुत सुन्दर रचना ……….

    Amit Dehati के द्वारा
    January 28, 2011

    सागर जी नमस्कार ! सागर जी आजकल किसी के भावनाओं से खेलना एक आम बात है …. लोगों को एक दुसरे के प्रति मजाक उडाना टाइम-पास करने का अच्छा साधन हो गया है ……. तारीफ के लिए आभार ! धन्यवाद

AK के द्वारा
January 27, 2011

Owesome…….Really……

    Amit Dehati के द्वारा
    January 28, 2011

    तारीफ़ के लिए शुक्रिया ……| मैं चाहूँगा की आप ये इनायत हमेशा बनाये रखे .. शुक्रिया

Khushi के द्वारा
January 26, 2011

Half century par hardik badhai !

    Amit Dehati के द्वारा
    January 26, 2011

    बहुत बहुत धन्यवाद ख़ुशी जी …… HAPPY REPUBLIC DAY !

Khushi के द्वारा
January 26, 2011

Amit jee aapki aapbiti bhi kisi shayri se kam nahi …….. wahan jo hua wakai galat hua lekin koi baat nahi ……..jindagi me utar chadav dekhne ko nahi milegaa to sudharne ka mauka bhi nahi milega… Sona jabtak tapta nahi shudh nahi hota …. behtarin rachna ……dhanyavaad

    Amit Dehati के द्वारा
    January 26, 2011

    ख़ुशी जी नमस्कार जी …….. वाकई आप लोगों का स्नेह देख कर भावुक हो जा रहा हूँ ……….. कविता को सराहने के लिए आभार ….. कृपया ये इनायत बनाये रखे ……… शुक्रिया !

Varun के द्वारा
January 26, 2011

बहुत सुन्दर अमित जी …….वाकई दिल को छू गया आपकी कविता .. बधाई स्वीकारें … धन्यवाद !

    Amit Dehati के द्वारा
    January 26, 2011

    बस ये मेहरबानी बरकरार रखे ! हौसला अफजाई के लिए आभार ! भ्राता श्री HAPPY REPUBLIC DAY ! शुक्रिया !

January 25, 2011

बड़ी मुद्दत से दिन आया है , खुशियों का माहौल भी छाया है . सब बाँट लो खुशियाँ मिल-जुलकर . मन हर्षित यूँ ही हर बार रहे … अमित भाई, चिता मत करो, बस ये खुशियाँ हमारे साथ बांटते रहो……..हमहू ना…….यानी की मैं हूँ ना……..ब्लागगिंग के सारे फंडे तुम जानते हो भाई, बहुत आगे जाओगे, ऐसा मैं पहले भी कह चूका हूँ. ……कोई जब तुम्हारा ह्रदय तोड़ दे………..तब तुम मेरे पास आना……

    Amit Dehati के द्वारा
    January 26, 2011

    इस तनहा और उदास जिंदगी में आप ही लोगों का सहारा है …… मैं दिल से JJ का शुक्रिया अदा करता हूँ की इतने अच्छे फॅमिली से रु-बी-रु होने का मौका दिया | दो लाइन —- यहाँ हर कदम पे मंजर नजर आया है , तनहाइयाँ, मजबूरियां , खामोशियों का साया है ,,,,,…. बाकि फिर कभी …………………… बस ये मेहरबानी बरकरार रखे भ्राता श्री ! हौसला अफजाई के लिए आभार ! भ्राता श्री HAPPY REPUBLIC DAY !

    वाहिद काशीवासी के द्वारा
    January 29, 2011

    पास नहीं आना दूर नहीं जाना तुमको सौगंध है कि आज ……………………बंद है

    Amit Dehati के द्वारा
    January 30, 2011

    पास नहीं आना दूर नहीं जाना तुमको सौगंध है कि आज ……….ठेका …………बंद है, भ्राता श्री कम से कम लाइन तो पूरा कर दो …..हे हे हे हे ….

    Dontarrious के द्वारा
    May 26, 2011

    You’re a real deep thinker. Tahkns for sharing.

Pinky के द्वारा
January 25, 2011

अमित जी क्या कहूँ उन खुशनसीबो /बदनसीबो को …..? बहुत खुबसूरत लाइने……….. तुम हटो नहीं कभी मुस्किल से , डट करके जित लो हर मुश्किल . मुश्किल को मुश्किल रहने दो , ये लालच तुम्हे हरबार रहे … लिखते रहो …….कितने खुस्नाशिब थे वो लोग की इतनी अछि कविता उन्हें सुनाने को मिला था और इतने अच्छे युवा कवी से ….. बहुत बढ़िया बधाई स्वीकारें …….

    Amit Dehati के द्वारा
    January 26, 2011

    पिंकी जी नमस्ते ! बहुत अच्छा लग रहा आप लोगों की तारीफ सुनके ! पिंकी जी अगर वहा मेरी रुसवाई हुई तो मुझे दुःख नहीं है क्यूंकि मैं हूँ ही उस लायक | इस्देहती गावर को ये जो JJ पर इज्जत मिली है क्या कहूँ ……….उस मंजर को सोच कर आँखे ……… तारीफ के लिए शुक्रिया ! कृपया यूँ ही हौसला अफजाई करते रहे !

    Amit Dehati के द्वारा
    January 26, 2011

    पिंकी जी HAPPY REPUBLIC DAY !

Niyaz ahamad के द्वारा
January 25, 2011

अमित जी जो भी हो, लिखते सुन्दर हो ……… और ये जो कविता है वाकई लाजवाब है कसम से …… बस ये जोस बरकरार रखना …. शुक्रिया

    Amit Dehati के द्वारा
    January 26, 2011

    नियाज़ जी आदाब! प्रतिक्रिया के लिए तहे दिल से शुक्रिया ! कृपया इनायत बरकरार रखे !

January 25, 2011

बड़ी मुद्दत से दिन आया है , खुशियों का माहौल भी छाया है . सब बाँट लो खुशियाँ मिल-जुलकर . मन हर्षित यूँ ही हर बार रहे … अमित भाई, चिंता मत करो, हम इन भावनाओं का पूरा ध्यान रखेंगे. ब्लागगिंग के सारे फंडे तुम्हे पता है भईया, दूर तक जाओगे, ये बात मैं पहले भी कह चूका हूँ.

    Amit Dehati के द्वारा
    January 26, 2011

    भ्राता श्री प्रणाम ! बस यूँ ही हौसला अफजाई करते रहे …….फिर तो किसी भी मुकाम को छूने की कोशिस करेंगे !!!!!!!! धन्यवाद !

    Jeannie के द्वारा
    May 26, 2011

    Wow, your post makes mine look feblee. More power to you!

roshni के द्वारा
January 25, 2011

अमित जी , क्या ये सत्य कथा है ? क्या सच में ऐसा हुआ है ? लेकिन हाँ आपकी कविता पढ़कर तो नहीं लगता की आपकी रुसवाई हुई होगी …. खेर कहते है कला की कदर लोगों को जल्दी नहीं होती …… आपकी कविता उस दोस्त के लिए सच में एक अच्छा तोहफा है मगर आप लोगों के सुनने का दुःख न करे दोस्त ने तो सुनी …… बस यही काफी है …… एक दोस्त काफी है समझने के लिए बाकि दुनिया न समझे तो गम नहीं, सो खुश रहिये ……….और खुशियाँ बाँटिये …..

    Amit Dehati के द्वारा
    January 26, 2011

    रौशनी जी नमस्ते ! सबसे पहले आपका शुक्रगुजार हूँ जो आपने इनायत की प्रतिक्रिया करने की ! रौशनी जी ये बिलकुल सत्य घटना है , वो दिन मेरे लिए बहुत बुरा दिन था लेकिन अपने दोस्त ख़ुशी ने को देखकर मुझे भी खुश होना पड़ा ! धनयवाद !

    Amit Dehati के द्वारा
    January 26, 2011

    और ये तो आपकी बड़कपन है जो इतनी तारीफ़ करी | कास के सभी आपकी तरह वहां होते !……. आपने बिलकुल सही कहा की कला की कद्र लीगों को जल्दी समझ में नहीं आती …. बहुत बहुत धन्वाद !

    Amit Dehati के द्वारा
    January 26, 2011

    रौशनी जी HAPPY REPUBLIC DAY !

    Lillah के द्वारा
    May 26, 2011

    More posts of this quality. Not the usual c***, plaese

abodhbaalak के द्वारा
January 25, 2011

अपने गुरु का अनुसरण करते हुए सब से पहले आपको ४थि सेंचुरी पर बंधाई, आप अच्छा लिखते हैं इसमें को संदेह नहीं है और दिन बा दिन …. ऐसे ही लिखते रहें http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

    Amit Dehati के द्वारा
    January 26, 2011

    बहुत -बहुत धन्यवाद अवोध जी ! बस यूँही हौसला अफजाई करते रहे और इस स्नेह में कमी न आने दें ! प्रतिक्रिया के लिए आभार !

    Amit Dehati के द्वारा
    January 26, 2011

    अवोध जी HAPPY REPUBLIC DAY  

Alka Gupta के द्वारा
January 25, 2011

अमित जी ,बहुत ही खूबसूरत कविता ! लेखनी उन्नति के पथ पर अग्रसर हो , शुभाशीर्वाद !

    Amit Dehati के द्वारा
    January 25, 2011

    अलका जी आपका तहे दिल से शुक्रिया …….. चलिए इस महफ़िल यानि JJ की महफ़िल ने मुझे सम्हाला …. आपके स्नेह की मुझे बहुत जरुरत है . उम्मीद है आगे भी मिलेगी ! अलका जी जब आप आशीर्वाद देती है तो उंदर से एक अजीब फिल्लिंग होती है | बिलकुल एक माँ की तरह ……. धन्यवाद !

nishamittal के द्वारा
January 25, 2011

देहाती जी,बस हम तो आपके लिए शुभकामनाएं कर सकते है कि आपका मनोरथ पूरा हो.

    Amit Dehati के द्वारा
    January 25, 2011

    माता श्री प्रणाम ! शुभकामना के लिए बहुत बहुत धन्यवाद ! लेकिन अरे ये क्या ……आप जैसे लोग इस घटना पे थोड़ी सा मंथन न करें थोडा विचार व्यक्त न करे तो कौन करेगा !!!!!!!!!!

    Amit Dehati के द्वारा
    January 25, 2011

    आपके विचार , दो शब्द की आवश्यकता है !!!! कृपया व्यक्त करें !

roshan pandey के द्वारा
January 25, 2011

क्या बात है अमित देहाती जी आप तो निखारते जा रहा है . लगे रहिये ………………..सफलता बहुत करीब है ……………

    Amit Dehati के द्वारा
    January 25, 2011

    बहुत-बहुत धन्यवाद ! तारीफ के लिए शुक्रिया !

MK के द्वारा
January 25, 2011

बहुत सुन्दर रचना!!!!!!!!!!!!!!!! एकदम दिल को छू जाने वाली कविता !

    Amit Dehati के द्वारा
    January 25, 2011

    MK जी नमस्कार ! कास के आप जैसे लोग उस महफ़िल में होते !!!!!!! तारीफ के लिए धन्यवाद !

    Butch के द्वारा
    May 26, 2011

    Real brain power on display. Thanks for that awnser!

Amit bhojpury के द्वारा
January 25, 2011

अमित जी नमस्कार ! अमित जी आपकी कविता दिल को छू गई वाकई | आपने जिस मोमेंट में इस कविता को लिखे होंगे उसके अकार्डिंग बिलकुल कविले तारीफ | वहां के लोग इसके लायक थे नहीं लेकिन ये तो आपकी महानता है की आपने उसे वह प्रेजेंट किया ! बधाई स्वीकार करें !

    Amit Dehati के द्वारा
    January 25, 2011

    अमित जी नमस्कार ! मैं नहीं मानता की वहां के लोग वैसे थे ….यदि ऐसा होता तो मै ये गलती नहीं करता | हाँ ये हो सकता है की उनका गिफ्ट अच्छा था इस लिए उन्हें गुरुर हो !!!!! तारीफ के लिए धन्यवाद !

आशुतोष के द्वारा
January 25, 2011

अमित जी ……. बहुत ही सुन्दर लाइन तुम हटो नहीं कभी मुस्किल से डट करके जित लो हर मुस्किल……….. सुन्दर रचना है यकीं मानिए ! बस आप लिखते जाएँ ! बधाई !

    Amit Dehati के द्वारा
    January 25, 2011

    प्रतिक्रिया के लिए आभार …. तारीफ के लिए शुक्रिया !

    Leatrice के द्वारा
    May 26, 2011

    You’re a real deep thinker. Tahnks for sharing.

Vijay Rastogi के द्वारा
January 25, 2011

अमित जी नमस्कार ! बहुत सुन्दर रचना अमित जी

    Amit Dehati के द्वारा
    January 25, 2011

    Vijay जी तारीफ के लिए शुक्रिया ! बहुत-बहुत धन्यवाद

Vikas के द्वारा
January 25, 2011

सच कहू अमित जी तो बहुत-बहुत ही सुन्दर रचना है यकीं मानिए ! बस आप लिखते जाएँ ! बधाई स्वीकार करें !

    Amit Dehati के द्वारा
    January 25, 2011

    विकास जी नमस्कार ! सबसे पहले स्वागत है आपका …… प्रतिक्रिया के लिए आभार …. तारीफ के लिए शुक्रिया !

Rahul Upaadhyay के द्वारा
January 25, 2011

अमित जी प्रणाम ! बहुत सुन्दर रचना अमित जी …………………….. क्या कहूँ आपके दोस्त को कहूँ या वहां के लोगों को ,………लेकिन एक बात तय है के वहां के लोग इसके काबिल थे ही नहीं क्यूंकि उन्हें ये भाषा समझ में ही नहीं आती. वो तो इसे इंजॉय मान लेते ………. लेकिन सच कहू अमित जी बहुत-बहुत सुन्दर रचना ! बस आप लिखते जाएँ ! बधाई स्वीकार करें !

    Amit Dehati के द्वारा
    January 25, 2011

    राहुल जी नमस्कार ! सबसे पहले स्वागत है आपका …… सही कहा आपने …..आजकल लोगों को किसी के भावनाओं के साथ खेलने में मजा आता है ! मै नहीं मानता की मैंने अच्छा लिखा था लेकिन किसी की ………….. खैर छोडिये ….बात निकलेगी तो दूर तलक जायेगी ……. बहुत-बहुत धन्यवाद ! तारीफ के लिए शुक्रिया !

rajkamal के द्वारा
January 24, 2011

चोथे शतक पर मुबारकबाद

    Amit Dehati के द्वारा
    January 25, 2011

    बहुत-बहुत धन्यवाद राजकमल जी !

rajkamal के द्वारा
January 24, 2011

अमित जी … हम तो आपसे किसी मुशायरे कि आस लगाए बैठे थे ….. इधर आपकी भाभी श्री के बहुत से कपड़े भी फीचने के लिए इकट्ठा हुए पड़े है ….. वोह नामुराद सिर्फ मेरे हाथ के धुले हुए ही पहनना पसंद करती है , नही तों फिर मेरी धुलाई किया करती है …. देखना भाई जरा जल्दी कोई मुशायरा करवाना , कहीं ऐसा ना हो कि वोह बेचारी इतनी सर्दी में मल्लिका कि तरह ………………………? भाई साहिब आपने कविता दी है तों मैंने अपना दिल दिया था गिफ्ट में ….. हाल मेरा भी कुछ आपसे जुदा नही था…. उस शेयर को अगले लेख में पेश करूँगा …. आपकी कविता अच्छी है , लेकिन इस को बेहतरीन कहना अनुचित होगा ….. उम्मीद है कि जितना आप ज्यादा लिखेंगे ,और भी निखरते जायेंगे ….

    Amit Dehati के द्वारा
    January 25, 2011

    भ्राता श्री प्रणाम ! भ्राता श्री भाभी श्री को एकदिन घुमाओ-फिराओ या फिर आपको फुरशत नहीं तो मैं हूँ न !!!!!!! वश्नो देवी जायेंगे ……द्वारका जायेंगे . तब उनका मूड फ्रेस होगा क्या आप भी ……………..?\ भ्राता श्री बोर हो गयी है ………फिल-हाल .मेरे मुशायरे में उन्हें भेजो …..अच्छा फिल – हाल होगा ………..हे हे हे … तारीफ के लिए शुक्रिया !

    Amit Dehati के द्वारा
    January 25, 2011

    आपसे इसी प्रकार के प्रतिक्रिया की उम्मीद थी \\ बहुत-बहुत धन्यवाद !

allrounder के द्वारा
January 24, 2011

भाई अमित एक कहावत है तोहफा देने वाले की नियत देखी जाती तोहफे की कीमत नहीं फिर भी तुम्हारे दोस्त के नसीब मैं इतनी सुन्दर रचना भी लिखी थी जो तुमने यहाँ पेश की ! बहुत ही उत्तम रचना के लिए बधाई !

    Amit Dehati के द्वारा
    January 25, 2011

    भ्राता श्री प्रणाम ! जब हम गाँव में एक साथ चलते थे तो लोग कहते थे की वो देखो कृष्ण -सुदामा आ रहे है और हमें सुनकर अच्छा लगता था | लेकिन मैं ये भूल गया था की ये कलयुग है द्वापर नहीं ! भ्राता श्री कास के वो समझ गए होते ………….. तारीफ के लिए शुक्रिया !

deepak pandey के द्वारा
January 24, 2011

अमित जी कहते है की दोस्त और सिगरेट हमेशा फ़िल्टर करके यूज करना चाहिए . तोहफे में भावनाओ के आगे रुपयों की क्या कीमत . वास्तव में वे इतनी अछि कविता के लायक नहीं थे . बहुत ही अछि कविता.

    Amit Dehati के द्वारा
    January 25, 2011

    पाण्डेय जी नमस्कार ! सबसे पहले स्वागत है आपका ……. दीपक जी फ़िल्टर तो किया था लेकिन वक्त इस कदर पलती मरेगा ये नहीं पता था तारीफ के लिए शुक्रिया !

Deepak Sahu के द्वारा
January 24, 2011

अबोध जी! गिफ्ट का मूल्य उसकी कीमत से नहीं बल्कि उसे देने वाले के दिल और उसके प्यार से आकां जाता है! चाहे उसकी कीमत कुछ भी न हो! सुंदर रचना के लिए बधाई दीपक

    Amit Dehati के द्वारा
    January 25, 2011

    दीपक जी नमस्कार ! सबसे पहले स्वागत है आपका ……. बिलकुल सही कहा आपने लेकिन उसमे मेरे मन का क्या कसूर …. बस एक छोटी सी गुस्ताखी . शायद उसको लगा होगा की पैसे बचाने के चक्कर में ये ढोंग कर रहा है ……लेकिन ऐसा नहीं था …….

    Amit Dehati के द्वारा
    January 25, 2011

    तारीफ के लिए शुक्रिया !


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