Kuran ko Jalaa Do ... BuT क्यूँ ?

Think Zaraa हटके ...

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3 साल में कसाब पर फूंके गए 16 करोड़...

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आज की ताज़ा खबर…

बहुत ही गर्व महसूस हो रहा है ये सुनके , की कसाब जो पाकिस्तानी मूल का इंडियन मेहमान है उनके खातिरदारी में महारास्ट्र और भारत सरकार 3 साल में 16 करोड़ रुपये खर्च किये है…

मुझे ये सुचना आप लोगों तक पहुचाते हुए काफी हर्ष हो रहा है. मैं खुद को गौरववान्वित महसुस कर रहा हूँ की हमारा देश इन मामलो में तरक्की कर रहा है . अब समझ में आया है महंगाई का मेन रीजन . आप सब लोगों के लिए भी गौरव की बात है. मैंने तो ये खबर सुनके सुबह से ही लोगों को दावत पर बुला रहा हूँ . मिठाइयाँ भी बाटीं है , और रात को दिवाली से भी जबरदस्त लाइट्स वगैरा का प्लानिंग है. चिंटू की मम्मी को बोल दिया है की देश आज पहली बार तरक्की के सारे रिकार्ड्स तोड़े है, तो देश के लिए इतना तो बनता ही है. आज का दिन देश के नाम पूरी तरह से कोई कंजूसी नहीं …जय हिंद जय भारत

आप लोग भी जश्न मनाइये…

मैं एक MNC कंपनी में सपोर्ट इंजिनियर हूँ. मेरी तनख्वाह कुछ खास नहीं है. लेकिन खुद को मेनटेन ठीक-ठाक से करता हूँ.

मेरा Status जरुरी नहीं है बताना फिर भी लिखना पड़ रहा है….

मकान का किराया —            12000.         . दो लोग रहते है.
ऑफिस आने-जाने का –        3000.          . पेट्रोल का.
मोबाइल खर्च –                      1500.
राशन खर्च –                          2000.
कपडा प्रेस करने का –               300.
अदर खर्च मैक्सिमम —           3000.

टोटल महीने का खर्च —       15800 .00 –    जबकि कंपनी में समय की कोई सीमा नहीं है .

लगभग मेरे भी अच्छे खासे खर्च हो जाते ….और मुझे लगता है की हर किसी के लिए इतना सफ़िसिएन्त है यदि वो अकेले है …

और कसाब के खर्चे हैं–         4444444.4 /month

बाप रे ………………………….

उपरोक्त ब्यौरा के आधार पे मैं आप आप सभी देशवासियों से जवाब चाहता हूँ …मैं चाहता हूँ की आप सभी इस मुद्दे पे दो शब्द कहे ….

धिक्कार है मुझे ऐसी पोलिसी और ऐसे कानून पे …..साला आम जनता का खून चूस – चूस कर
और ऐसे कीड़ों पे बर्बाद किया जा रहा है जिसे दुनियां में रहने का कोई अधिकार नहीं.
मुझे मालूम है की ये पैसे कसाब पे खर्च नहीं हुए होंगे लेकिन मोहरा तो बना है न….?

वजह तो वही है न..!!!!!!!
बर्बाद तो हुआ न …!!!!!!!

हाय रे कानून बेवस्था और हाय रे राजनीती . लानत है मुझे ऐसे सिस्टम पे….
ये समाचार जबसे सुना हूँ मेरा खून खौल रहा है. मैं एक लेखक हूँ मुझे इतना गुस्सा अच्छी बात नहीं लेकिन इसके साथ-साथ मैं एक देशभक्त भी हूँ. …..

बंद करो यार ये राजनीती ….please stop it …

कृपया मेरे शब्दों के प्रयोग को बुरा मत मानियेगा बतों पे ध्यान दीजिये . किसी को बुरा लगे तो छमा चाहूँगा…

मैं फिर बहुत जल्द इस मैटर के साथ लौटूंगा …..

धन्यबाद!

आप सबका शुभचिंतक
अमित देहाती

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30 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

अनूप मिश्रा के द्वारा
November 23, 2011

सारे भ्रष्ट नेताओं को ही कसाब से पहले फ़ासी पर चढ़ा दिया जाए| फिर उनकी राजनीती ख़त्म हो जाएगी | धन्यबाद ! अनूप मिश्रा

    Amit Dehati के द्वारा
    November 24, 2011

    अनूप जी बिलकुल आपने सही कहा …. आपका बहुत बहुत आभार… धन्यबाद !

Saurabh Rawat के द्वारा
November 23, 2011

आदरणीय अमित जी , मैंने शायद आपका सपोर्ट नहीं किया लेकिन अब करता हूँ. देश के लिए तो हर युवावों को हरदम तैयार रहना चाहिए … बस ये जूनून आपके ब्लोग्स से हमेशा झलकती रहे यही हमारी कामना है. धन्यबाद !

    Amit Dehati के द्वारा
    November 23, 2011

    शुक्रिया सौरभ जी आपने मेरी बात को समझा ……धन्यबाद !

    Amit Dehati के द्वारा
    November 24, 2011

    देर आये दुरुस्त आये … देश के प्रति वफादारी ही सबसे बड़ा धन है और धर्म है .

Gaurav के द्वारा
November 23, 2011

आदरणीय अमित जी ! आपका जूनून देखकर मुझे भी देश के प्रति कुछ करने की एक अजीब सी लगन हो रही … बहुत अच्छा मुद्दा उठाया आपने . बहुत बहुत धन्यबाद !

    Amit Dehati के द्वारा
    November 23, 2011

    आदरणीय गौरव जी आप ही जैसे युवावों की देश को जरुरत है ….. आपने आपना बहुमूल्य समय हमारे लिए निकला बहुत बहुत धन्यबाद !

allrounder के द्वारा
November 23, 2011

अमित जी, अच्छे आलेख के साथ मंच पर उपस्तिथ होने के लिए बधाई !

    Amit Dehati के द्वारा
    November 23, 2011

    आदरणीय सचिन सर आप मेरे आलेख को तवज्जो दिया यही मेरे लिए फक्र की बात है | वैसे आप इस आलेख पर दो शब्द कहते तो मुझे ख़ुशी होती . आपका बहुत-बहुत धन्यबाद !

alkargupta1 के द्वारा
November 23, 2011

अमित जी लम्बे समय के बाद यहाँ मंच पर अपनी सार्थक रचना के साथ आये पढ़कर अच्छा लगा देश में हमेशा से ही यही राजनीति रही है कि मोहरा किसी को बनाया जाये और पैसा खुद लूटा जाये कुछ भी कहें या करें इनके कान पर जूँ तक रेंगने वाली नहीं…..

    Amit Dehati के द्वारा
    November 23, 2011

    आदरणीय अलका जी प्रणाम ! आपका बहुत बहुत धन्यबाद जो आपने मेरी रचना पर दो शब्द व्यक्त किया |

    Amit Dehati के द्वारा
    November 23, 2011

    आदरणीय अलका जी जिस दिन देश की जनता जाग जाएगी उस दिन भ्रस्ताचारियों के घर के एक एक ईंट उखड जायेंगे … आपका बहुत बहुत धन्यबाद जो आपने मेरी रचना को सार्थक किया .. कृपया यूँही हौसला अफजाई करते रहें .

krishnashri के द्वारा
November 22, 2011

महोदय , प्रत्येक भारतीय के भावों को व्यक्त करती पोस्ट ,परन्तु ये नहीं सुधरेंगे / सधन्यवाद

    Amit Dehati के द्वारा
    November 23, 2011

    आदरणीय कृष्णा जी नमस्कार! कृष्णा जी प्रत्येक भारतीय के भावों को ब्यक्त करती लेकिन प्रत्येक भारतीय चाहने लगे तो सभी सुधर जायेंगे … आपका बहुत बहुत धन्यबाद !

shashibhushan1959 के द्वारा
November 22, 2011

मान्यवर अमित जी, सादर बहुत निर्लज्ज हैं, ये चोर हैं, लतखोर हैं पक्के, जगो जनता न इनका साथ दो, मारो इन्हें धक्के. पिलाकर दूध पालें सांप को ये आस्तीनों में, खिलाएं चिकन बिरयानी करोड़ों खर्च हो जिसमें. . पसीने की कमाई है, लुटाते हो जिन्हें इसपर, जिसे फाँसी चढ़ाना है, उसी का है सुरक्षित घर. समझ पाती नहीं जनता करे तो क्या करे इनका, भरोसा तोड़ते हैं वे, भरोसा था हमें जिनका. . आपकी रचना पूरे देश की जनता के क्रोध का प्रतिनिधित्व कर रही है. इस क्रोध की अग्नि में वे कब जलेंगे, यह देखना है. सधन्यवाद.

    Amit Dehati के द्वारा
    November 23, 2011

    आदरणीय शशिभूषण जी आपका स्वागत है . आपकी रचना सारे देश के युवावों में एक नयी जोस भर रही है . बिलकुल आपने सही लिखा . लेकिन सीधे तौर पर इसका जोम्मेदार कौन ….शायद ये जबाब सबके पास है लेकिन कोई दोषी नहीं बनना चाहता .. आपका बहुत बहुत धन्यबाद !

nishamittal के द्वारा
November 22, 2011

अमित आप बहुत दिन बाद मंच पर आये अच्छा लगा कसाब पर या कसाब के नाम पर पिस्दा पानी की तरह बहा और आपकी ही भाँती देश के हितेषियों ने आवाज़ भी बुलंद की है परन्तु सरकारें वधिर हो चुकी हैं.

    nishamittal के द्वारा
    November 22, 2011

    कृपया पैसा पढ़ें.

    Amit Dehati के द्वारा
    November 23, 2011

    आदरणीय निशा जी प्रणाम ! निशा जी मेरा सपोर्ट करने के लिए धन्यबाद ! आखिर कबतक यूँ ही किसी और के कंधे पे बन्दुक रखकर दुराचारी और घोटालेबाज मस्ती लूटते रहेंगे .

    Amit Dehati के द्वारा
    November 23, 2011

    आखिर कबतक हम अपने आँखों पे पट्टी बांधे फिरते रहेंगे ….. यहाँ अब लोकतंत्र न रहा . यहाँ जरुरत है मिश्र की तरह एक तूफान की जो सबको चौका दें . मैं आपका दिल से abhari hun…. आपका बहुत बहुत धन्यबाद !

Santosh Kumar के द्वारा
November 22, 2011

अमित जी , बहुत अच्छी पोस्ट ,..जब पूरी व्यवस्था ही सड़ चुकी हो तो…हार्दिक साधुवाद

    Amit Dehati के द्वारा
    November 22, 2011

    आदरणीय संतोष जी आपका बहुत बहुत स्वागत है. संतोष आपने बिलकुल सही कहा की साडी व्यवस्था ही सड़ गयी है … लेकिन संतोष जी इसको कौन सड़ा रहा है …….कौन है इसका जवाबदेह … धन्यबाद आपने इस ब्लॉग के लिए समय निकला ….

abodhbaalak के द्वारा
November 22, 2011

अमित जी वेलकम बैक, काफी समय के बाद आपका कोई लेख पढने को मिला, धारदार,………. हम तो बस ऐसे ही हैं, और ऐसे ही जब तक रहेंगे तब तक ……….. http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

    Amit Dehati के द्वारा
    November 22, 2011

    अबोध जी आपको कोटि-कोटि प्रणाम ! मजा नहीं आया अबोध जी | आप जैसे महँ लोग देश के बारे में दो शब्द न कहे तो फिर कौन कहेगा. हमें जरुरत है सिस्टम को बदलने की ….. कृपया दो शब्द कहे. आपका बहुत बहुत धन्यबाद !

Saurabh Rawat के द्वारा
November 22, 2011

अमित जी बात बर्दास्त करने की नहीं | बात है कानून की रक्षा करने की .

    Amit Dehati के द्वारा
    November 22, 2011

    प्रिय सौरभ जी ….कैसा क़ानून किस कानून की बात कर रहे .. जिसको तिन-तिन फासी और १० आजीवन कारावास है उसके ऊपर देश का १६ करोड़ खर्च कर दिया गया … जिस कोर्ट ने उसे सजा सुनाया वो कानून तोड़ कर थोड़ी न सुनाया था …. माफ़ी चाहूँगा … धन्यवाद !

Saurabh Rawat के द्वारा
November 22, 2011

बहुत अछि पोस्ट इसके लिए धन्यबाद .

    Amit Dehati के द्वारा
    November 22, 2011

    बहुत बहुत धन्यबाद जो आपने मेरे पोस्ट का समर्थन किया ,,,,

Saurabh Rawat के द्वारा
November 22, 2011

डिअर अमित जी , सुरुआत में आपने गुमराह ही कर दिया लेकिन अंत बिलकुल सही किया .. आपकी ब्लोग्स को पढ़ के चुप नहीं रहा गया ……. आपने बिलकुल सही लिखा की हमारा देश इस मामले में बुलंदियों को छू रहा है … एक मुजरिम को मेहमान सा खातिरदारी …. कुछ कहिये देहाती जी ये ये भी एक अच्छा काम है.

    Amit Dehati के द्वारा
    November 22, 2011

    आदरणीय सौरभ जी नमस्कार ! आखिर कबतक हम गरीबों का पैसा युहीं लुटाते रहेगें . कब जागेंगे हम…


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