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लगाम, समाज में फैलती कुकृत्यों पे !!!

Posted On: 12 Jun, 2012 Others में

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आप सभी पाठकगण को सादर प्रणाम !!!
अगर इस ब्लॉग से किसी को किसी भी प्रकार की असहजता महसूस हो तो वो कृपया सुझायें।


मेरा अनुभव !!!

आज हो रहे युवा पीढ़ी में अनैतिक कार्य जैसे यौन सबंध , समाज में फ़ैल रही कुकृतियाँ इस बात का अंदेशा है की कल और बुरा होगा । और इस में कारण है उम्र की पाबन्दी ……!!!!

मेरे ख्याल से इसको रोकने का एक ही रास्ता है जो निम्नलिखित है ….

अगर मेरी आवाज सरकार तक पहुचे तो , मै यहीं सलाह देना चाहूँगा की दोनों अर्थात लड़के और लड़की की शादी की उम्र टीनेज में ही निर्धारित कर दी जानी चाहिए और मिनिमम उम्र १६ कर देनी चाहिए ….क्यूंकि यही उम्र होती है जिसमे कोई बच नहीं पाया । और कोई खुद को रोक नहीं पाता विपरीत लिंगी से …।

मुझे लगता है की इससे समाज में बहुत सारे सुधार होंगे और संस्कृति भी सुरक्षित रहेगी.

आइये जाने ये मशवरा कितना साही है और कैसे …..?

१- इस उम्र में लगभग सभी सिनिअर सेकंड्री के इर्द गिर्द रहते है । इस उम्र में शारीरिक एवं मानशिक विकाश चरम पे रहता है ।

२- इस अवस्था में सबसे ज्यादा किशोर एवं किशोरियां सेक्स के बारे में ज्यादा सोचती है।

३- अगर पेरेंट्स इस समय अपने पुत्र/पुत्री की शादी किसी से तय कर दें तो ९० परसेंट किशोर/किशोरियां गलत संगत से बच जाएँगी. कारण ये है की उस उम्र में पेरेंट्स जिस तरह से चाहेंगे और जैसा आप्सन देंगे वैसे बच्चों को स्वीकार हो जायेगा क्यूंकि ये उम्र ही वैसी है की बिपरीत लिंगी जैसा भी हो अच्छा लगता है। और पेरेंट्स ढूढेंगे तो सही ही ढूढेंगे ।

४- जब बच्चों का दिमाग एक तरफ केन्द्रित हो जायेगा तो उसकी पढाई भी अच्छी होगी ।

५- इस उम्र में जो फिक्स हो गया वो किसी और के तरफ ध्यान नहीं देता । और साथ साथ बच्चे अपने अति उत्तेजित अवस्था से बाहर आ जायेंगे उस उम्र की सीमा को पर कर जायेगें और उन्हें पता भी नहीं चलेगा । उसके बाद उनको शारीरिक आकर्षण जो होता है विपरीत लिंगी के तरफ वो बहुत कम हो जायेगा। इससे समाज में दुराचार भी ९८ परसेंट कम हो जायेगा।

६- आज हो रहे समाज में दुराचार रेप के पीछे एक ही कारण है | उदाहरण के तौर पर- कोई खूब भूखा, कई दिनों से उसको खाने नहीं दिया जा रहा , अचानक उसको मौका मिलता है खाने का तो वह कुत्ते और गीधों की तरह नोच-नोच के खायेगा क्यूंकि वह भूखा है । ठीक उसी तरह सामाजिक बंधनों की वजह से लोगों को वह सब नहीं मिल पाता जिसकी जरुरत प्रकृति पैदा करती है उम्र के अनुसार । जैसे ही लोगों को मौका मिलता है दुराचार को अंजाम दे देतें है…

७- आज के बच्चे ही कल के दुराचारी होते है ……इस लिए हमें जरुरत है इस बात पर गौर करने की .

८- शादी शुदा लोगों के तरफ बहुत कम लोग ध्यान देते है । और जब सभी शादी शुदा नजर आएंगे तो किसी की ध्यान उस तरह से नहीं जाएगी जिस तरह से किशोरियों पे जाती है…।

हाँ हर चीज का एक साइड इफेक्ट होता है …उन बातों के लिए कड़े कानून बनाया जा सकता है जैसे -

१- जनसँख्या बृद्धि। इस पर रोक लगाने की लिए सरकार कोई कदम उठाये…

और भी इसके साइड इफेक्ट हो सकते है…

फ़िलहाल इतना ही …

अगर कोई भी त्रुटी हो तो कृपया क्षमा करें !

धन्यबाद !!!
अमित देहाती



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4 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

bharodiya के द्वारा
June 15, 2012

अमित बिलकुल सही लिखा है आप ने सिवा आबादीवाली बात के । १६ से २५ का समय ही बच्चे पैदा करने का समय है । २५ के बाद धीरे धीरे स्त्री अपनी बच्चे पैदा करने की क्षमता खोने लगती है । बडी उमर तक शादी नही करना या बच्चे होने से रोकना गलत है । आज बडे शहरों मे टेस्ट ट्युब बेबी के दवाखाने बढ रहे हैं और भीड भी हो रही है । कारण यही है । बुढे, सुखे ,पत्ते गीरते नही तो नये पत्तों का क्या दोष । नये पत्तों को तो उगना ही है । पूराने पत्ते सोचने लगे की पेड हमारा है, अब कोइ डाली पे जगह नही है, नये पत्ते नही उगने चाहिए । ये तो स्वार्थ हो जाता है ।

    Amit Dehati के द्वारा
    June 16, 2012

    आपको बहुत- बहुत धन्यबाद! आप मेरे विचार से सहमत हुए, मुझे ख़ुशी है. बिलकुल सही फ़रमाया आपने…..हे हे हे हे …. वैसे मुद्दा विचारणीय है और सबको इस बात पर ध्यान देना चाहिए …. भाई मुझे तो लगता ….और मैं इस लाइन का भक्त हु…. का बरखा जब कृषि सुखानी ….! आप भी अमल करें. धन्यबाद!

jlsingh के द्वारा
June 14, 2012

amit jee, saadar abhiwdan! aapke sujhaw tarkik roop se to sahee deekhte hain ….. lekin jyadatar logon ke wichar theek wipreet hain …… kuch cheejen samay aur paristhiti ke saath badal jaatee hain pahle shadiyan bachpan me ho jaatee thee tab jinhe padhna hota tha awshy padhte the … aaj sabkuch ulat pulat gaya hai …. niyam kanoon se samajik badlaaw kitne aa paate hain yah bhee aapne dekha hoga! aapke ytharthparak lekh par badhai!

    Amit Dehati के द्वारा
    June 16, 2012

    आपको बहुत- बहुत धन्यबाद! आप मेरे विचार से सहमत हुए, मुझे ख़ुशी है. कौन क्या सोचेगा परेशानी यहाँ नहीं है. कोई सोच नहीं रहा , परेशानी यहाँ है…. अगर लोग सोचे तो समाश्या का हल निकल जाये …. आपने सपोर्ट किया …..बहुत बहुत धन्यबाद !


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